प्रेम और भोजन का सम्बन्ध – ओशो | osho

प्रेम और भोजन बड़े गहरे जुड़े हैं। इसीलिए तो जब तुम्हारा किसी से प्रेम होता है तो तुम उसे भोजन के लिए घर बुलाते हो। क्योंकि बिना भोजन खिलाए प्रेम का पता कैसे चलेगा। जो तुम्हें बहुत प्रेम करता है, वह तुम्हारे लिए भोजन बनाता है। जब कोई स्त्री अपने प्रेमी के लिए भोजन बनाती … Read more प्रेम और भोजन का सम्बन्ध – ओशो | osho

भारत गरीब क्यों है? – ओशो | Osho

मुझ से लोग आकर पूछते हैं, विशेषकर जो अमरीका से आते हैं, वे मुझसे पूछते हैं कि भारत गरीब क्यों है? क्योंकि भारत मूढ़ है। गरीबी मौलिक नहीं है, मूढ़ता मौलिक है। मूल में मूढ़ता है। यहां धन को पकड़ने की आदत है, यहां धन को जीने की आदत नहीं है। यहां हर चीज को … Read more भारत गरीब क्यों है? – ओशो | Osho

चिंता का अर्थ क्या है? – ओशो | Osho

चिंता का अर्थ ही यह है कि बोझ मुझ पर है। पूरा कर पाऊंगा? नहीं; तुम साक्षी हो जाओ। कृष्ण ने गीता में यही बात अर्जुन से कही है कि तू कर्ता मत हो। तू निमित्त-मात्र है; वही करने वाला है। जिसे उसे मारना है, मार लेगा। जिसे नहीं मारना है, नहीं मारेगा। तू बीच … Read more चिंता का अर्थ क्या है? – ओशो | Osho

ध्यान का इतना ही अर्थ है- निर्विचार हो जाने की कला – ओशो | Osho

ध्यान का इतना ही अर्थ है- निर्विचार हो जाने की कला। और जिसके हाथ में निर्विचार होने की कला गयी, सोने की कुंजी आ गयी, जो सब ताले खोल दे। मैं तुम्हें ध्यान दे सकता हूं, ज्ञान नहीं दे सकता। इस भेद को ठीक से समझ लो। पंडित-पुरोहित तुम्हें ज्ञान देते हैं, ध्यान नहीं। और … Read more ध्यान का इतना ही अर्थ है- निर्विचार हो जाने की कला – ओशो | Osho

जब ओशो से किसी ने पुछा की मैं ध्यान करूं या भक्ति?

मैं ध्यान करूं या भक्ति? वर्षों से यही सोच रहा हूं। और चूंकि कुछ तय ही नहीं हो पाता है, इसलिए प्रारंभ भी करूं तो कैसे करूं?     कृष्णदास! मन के खेल बहुत सूक्ष्म हैं। मन की राजनीति बड़ी गहरी है। मन एक कुशल कूटनीतिज्ञ है। और उसकी सबसे बड़ी कूटनीति यह है कि … Read more जब ओशो से किसी ने पुछा की मैं ध्यान करूं या भक्ति?

ध्यान का अर्थ है होश – ओशो | Osho

ध्यान का अर्थ है होश। # तुम जो कुछ भी होशपूर्वक करते हो वह ध्यान है। कर्म क्या है, यह प्रश्न नहीं, किन्तु गुणवत्ता जो तुम कर्म में ले आते हो, उसकी बात है। चलना ध्यान हो सकता है, यदि तुम होशपूर्वक चलो। बैठना ध्यान हो सकता है, यदि तुम होशपूर्वक बैठ सको। पक्षियों की … Read more ध्यान का अर्थ है होश – ओशो | Osho

कभी रात अचानक नींद खुल गयी तो क्या करें? ध्यान करें – ओशो | Osho

सुनना ध्यान है l कभी रात नींद खुल गयी है, बिस्तर पर पड़े हो, अनिद्रा के लिए परेशान मत होओ, इस मौके को मत खोओ, यह शुभ घड़ी है। सारा जगत सोया है, पत्नी-बच्चे, सब सोए हैं, तो मौका मिल गया है। बैठ जाओ अपने बिस्तर में ही, रात के सन्नाटे को सुनो; ये बोलते … Read more कभी रात अचानक नींद खुल गयी तो क्या करें? ध्यान करें – ओशो | Osho

ध्यान क्या है? – ओशो | What is Meditation in Hindi by Osho

ध्यान के लिए एक घंटा निकाल लेना इसलिए उपयोगी है कि आप उस समय को पूरा का पूरा ही ध्यान में नियोजित कर सकते हैं। एक दफा कला आ जाए तो उस कला का उपयोग आप चौबीस घंटे कर सकते हैं। ध्यान एक कला है। फिर आप जो भी आप करें, वह ध्यानपूर्वक कर सकते … Read more ध्यान क्या है? – ओशो | What is Meditation in Hindi by Osho

जब विश्वामित्र क्षत्रिय से ब्राह्मण बनने का प्रण लिए – ओशो | Osho

बड़ी पुरानी कथा है कि विश्वामित्र क्षत्रिय घर में पैदा हुए और ब्राह्मण होना चाहते थे। लेकिन कोई कैसे अपनी चेष्टा से ब्राह्मण हो सकता है? उन्होंने बड़ी चेष्टा की, बड़ा तप किया। वशिष्ठ उन दिनों ब्रह्मज्ञानी थे। और जब तक वशिष्ठ न कह दें कि तुम ब्राह्मण हो गए, तब तक स्वीकृति न थी। … Read more जब विश्वामित्र क्षत्रिय से ब्राह्मण बनने का प्रण लिए – ओशो | Osho

मन को वश में कैसे करें? ओशो | How to Control Your Mind in Hindi by Osho

एक बार एक राजा ने सात जंगली घोड़े पकड़े। उसने उन्हें वर्ष भर खूब खिलाया-पिलाया और उनसे कोई काम भी नहीं लिया। वे स्वच्छंद घोड़े बहुत शक्तिशाली और खतरनाक हो गये। उन्हें अस्तबल से भी निकालना कठिन हो गया। उनके पास जाना भी खतरे से खाली नहीं था। तब उसने राज्य में घोषणा की कि … Read more मन को वश में कैसे करें? ओशो | How to Control Your Mind in Hindi by Osho

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